Patna: राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित और निर्माणाधीन ग्रामीण सड़कों तथा पुलों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने एवं विभागीय कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग ने सख्त कदम उठाये हैं. विभाग के विभिन्न कार्य प्रमंडलों में चल रही योजनाओं की जमीनी हकीकत की जांच करने के लिए कल 9 से 11 अप्रैल तक पूरे राज्य में निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा. इस अभियान को धरातल पर उतारने के लिए अभियंता प्रमुख जयकिशोर ठाकुर के निर्देश पर राज्यभर में कुल 82 वरिष्ठ जांच पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है. ये सभी नामित पदाधिकारी अपने आवंटित प्रमंडलों में जाकर मौके पर भौतिक सत्यापन करेंगे और निर्धारित चेकलिस्ट के आधार पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपेंगे.

इस तीन दिवसीय निरीक्षण अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल निर्माण कार्यों की भौतिक प्रगति देखना नहीं है, बल्कि गुणवत्ता नियंत्रण के तकनीकी पहलू की सूक्ष्मता से जांच करना है. जांच अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्माण स्थल पर गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला की स्थापना, आवश्यक गुणवत्ता रजिस्टरों की साइट पर उपलब्धता और गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्टों की कड़ाई से जांच करें इसके साथ ही, निविदा प्रक्रिया से लेकर एकरारनामा, बीमा की स्थिति, परफॉरमेंस सिक्यूरिटी और मौके पर मानव संसाधन तथा उपकरणों की स्थिति को इस विस्तृत चेकलिस्ट के दायरे में रखा गया है.

निरीक्षण के दौरान “हमारा बिहार हमारी सड़क” ऐप के माध्यम से आम जनता द्वारा दर्ज की गई शिकायतों के निवारण की अद्यतन स्थिति की भी विशेष रूप से समीक्षा की जाएगी, ताकि जन-समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो सके.

विभागीय स्तर पर इस बार उन योजनाओं और ग्रामीण सड़कों पर विशेष नजर रखी जा रही है, जहां 15 प्रतिशत से कम दर पर निविदाएं स्वीकृत हुई हैं. ऐसे सभी ग्रामीण सड़कों का जियोटैग की गई तस्वीरों के साथ अनिवार्य रूप से भौतिक सत्यापन किया जाएगा. इस दौरान अधिकारियों द्वारा पर्ट चार्ट, मिट्टी कटाई स्थल, खनन चालान, बिटुमेन चालान और उपकरणों की मौके पर जाकर जांच की जाएगी. इसके अलावा, डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड से बाहर हो चुकी ग्रामीण सड़कों की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी. यदि निरीक्षण में किसी ग्रामीण सड़क की स्थिति खराब पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदारों को सात दिनों के भीतर आवश्यक सुधार करने का सख्त निर्देश दिया जाएगा. यदि इस अवधि में त्रुटि का निवारण नहीं होता है, तो ठेकेदार के जोखिम और लागत पर अनुबंध को तत्काल प्रभाव से रद्द करने जैसी अत्यंत कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी. ग्रामीण कार्य विभाग का यह कड़ा रुख इस बात का प्रमाण है कि विभाग ग्रामीण जनता की सुलभता के लिए टिकाऊ बारहमासी सड़कें सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से संकल्पित है.

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