Ranchi: हुसैनाबाद स्थित किराए के मकान चल रहे ऑनलाइन गेमिंग से लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए 7 अपराधी को गिरफ्तार किया है. वही इस पूरे नेटवर्क का संचालन छत्तीगढ़ के भिलाई निवासी शेल्वी उर्फ मनीष, बिहार के औरंगाबाद जिले के आजन निवासी राजन कुमार सिंह और प्रवीण भैया करता था. तीनों आरोपी फिलहाल पुलिस गिरफ्त से दूर है. आरोपी म्यूल अकाउंट्स (फर्जी बैंक खातों) का प्रयोग करता था. ग्रामीण क्षेत्र के भोले-भाले लोगों को पैसे का लालच देकर उनके दस्तावेजों के माध्यम से बैंक खाते खुलवाए जाते थे और उनके एटीएम कार्ड, पासबुक एवं चेकबुक अपने कब्जे में रख लिए जाते थे. गिरफ्तार आरोपी झारखंड के अलावे बिहार, छत्तीसगढ़ के रहने वाले है. गिरफ्तार आरोपी में झारखंड के बोकारो जिले के जुबेर अंसारी, रामगढ़ जिले के अयाज आलम उर्फ टिंकु, रांची जिला के रहने वाले अक्षय कुमार कुंडू, बिहार के औरंगाबाद जिले क मदनपुर के रहने वावे सुजीत कुमार विश्वकर्मा, अजीत कुमार उर्फ अजीत कुमार विश्वकर्मा, रोहित कुमार सिंह उर्फ राजा और छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई के रहने वाले राहुल सिंह लोधी का नाम शामिल है. मौके पर से 2 आईफोन समेत 14 मोबाईल, एक लैपटॉप, एक टैब, 9 एटीएम कार्ड, 9 पासबुक, 9 चेकबुक, 5 मोबाइल खाली बॉक्स, 3 ऑनलाइन लेन-देन विवरण युक्त डायरी और एक राउटर सेट पुलिस ने बरामद किया है.
प्रतिदिन 7-8 लाख का होता था कारोबार
सोमवार को मामले की जानकारी देते हुए पलामू एसपी ने बताया कि हुसैनाबाद एसडीपीओ को गुप्त सूचना मिली कि हुसैनाबाद अनुमंडल स्थित अनिल कुमार विश्वकर्मा के तीन मंजिला मकान में पिछले कुछ दिनों से कुछ संदिग्ध युवक ठहरे हुए हैं, जो ऑनलाइन गेमिंग एवं सट्टे के माध्यम से ठगी का कार्य कर रहे हैं. तथा उनके पास अन्य संदिग्ध युवक भी लगातार आ-जा रहे हैं. सूचना पर हुसैनाबाद एसडीपीओ के नेतृत्व में एक विशेष छापामारी दल का गठन किया गया. गठित टीम उक्त मकान के तीसरे तल्ले पर छापेमारी की गई, जहाँ दो अलग-अलग कमरों में सातो आरोपी को लैपटॉप, टैबलेट एवं विभिन्न मोबाइल फोन के माध्यम से ऑनलाइन गेमिंग, बेटिंग गतिविधियों में संलिप्त पाए गए, जिन्हें मौके से गिरफ्तार किया गया. पूछताछ के क्रम में अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि वे महादेव बेटिंग ऐप से संबद्ध “Khelooyaar.site” नामक ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म का फ्रेंचाइजी (Franchise ID – 141) संचालित कर रहे थे. ग्राहकों से ऑनलाइन रुपये जमा करवाकर टोकन मनी प्रदान की जाती थी एवं जीत-हार के अनुसार लेन-देन किया जाता था. प्रतिदिन लगभग 7 से 8 लाख रुपये तक का अवैध ऑनलाइन कारोबार किया जा रहा था. जिसमें 70 प्रतिशत राशि प्रमोटर्स को तथा 30 प्रतिशत फ्रेंचाइजी को प्राप्त होती थी.
