Ranchi: परिजनों को दिखाने के लिए फर्जी आईएएस बनकर घूम रहे आरोपी आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया.  आऱोपी ‘भारत सरकार’ लिखी कार से रौब दिखाता था. करीब 7 साल से यह गोरखधंधा करने वाला फर्जी आईएएस पकड़ा गया. गिरफ्तार आरोपी राजेश कुमार हैदरनगर थाना क्षेत्र के ग्राम कुकही का रहने वाला है. आरोपी के पास से एक फर्जी आई०डी० कार्ड, जिस पर GOVT. OF INDIA, A.P. Circle, Sanchar Lekha Bhawan, Chikkadpally, Hyderabad–500020 अंकित है. नाम – Rajesh Kumar, पद – CAO (Jr. Grade), कोड – IP&TAFS/164/014, वैधता – 31.12.2020 तक, एक मोबाइल, एक Library Card, Chanakya IAS Academy का आईडी कार्ड, हुंडई Era कार (JH01Z-4884) के आगे लगा नीले रंग का फर्जी नेम बोर्ड, जिस पर GOVT. OF INDIA, CAO, DEPARTMENT OF TELECOMMUNICATION लिखा हुआ पुलिस ने बरामद किया है.

आरोपी पुलिस को पुछताछ में बताया कि उसके पिता का सपना था कि वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में अधिकारी बने. उसने UPSC की परीक्षा में चार बार प्रयास किया, किंतु सफल नहीं हो सका. इसके बाद उसने अपने पिता, परिजनों एवं रिश्तेदारों से झूठ बोल दिया कि वह IPTAFS अधिकारी बन गया है और विगत 6–7 वर्षों से फर्जी अधिकारी बनकर जीवन यापन कर रहा था. इस संबंध में हुसैनाबाद थाना (कांड संख्या-01/26) में मामला दर्ज किया गया है.

रिश्तेदार के जमीनी विवाद का पैरवी लेकर पहुंचा था थाना

पुलिस से मिली जानकारी के अऩुसार बीते शुक्रवार को एक व्यक्ति अपने रिश्तेदार के जमीनी विवाद में पैरवी कराने के लिए हुसैनाबाद थाना प्रभारी से मिलने थाना पहुँचा. जिसने अपना नाम राजेश कुमार बताते हुए स्वयं को 2014 बैच का उड़ीसा कैडर का आईएएस अधिकारी बताया तथा वर्तमान में भुवनेश्वर के खरवेला नगर में C.A.O. (Chief Accounts Officer) के पद पर पदस्थापित होना बताया. थाना प्रभारी जब उसकी पोस्टिंग के संबंध में पूछताछ किया तो उसने बताया कि वह देहरादून, हैदराबाद एवं भुवनेश्वर में कार्य कर चुका है. अलग-अलग राज्यों में पदस्थापन को लेकर संदेह होने पर पूछताछ करने पर उसने अपना बयान बदलते हुए स्वयं को IPTAFS (Indian P&T Accounts and Finance Service) का अधिकारी बताया, जो UPSC द्वारा चयनित एवं आईएएस के समकक्ष होता है. इसके बाद वह व्यक्ति थाना से चला गया. व्यक्ति के पद एवं पहचान पर संदेह होने पर उक्त समस्त जानकारी हुसैनाबाद एसडीपीओ को दी गई. प्रारंभिक जाँच उसके गाँव के लोगों एवं अन्य स्रोतों से की गई गहन पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ कि वह व्यक्ति किसी भी प्रकार का IPTAFS अधिकारी नहीं है. इसके पश्चात उक्त व्यक्ति को थाना बुलाकर पूछताछ की गई. पूछताछ के दौरान उससे उसकी पहचान, नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र एवं विभागीय दस्तावेजों की माँग की गई, परंतु वह कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका और न ही कोई संतोषजनक उत्तर दे पाया. गहन जाँच में यह तथ्य सामने आया कि वह व्यक्ति किसी भी सरकारी सेवा में नहीं है. पूछताछ के दौरान उसने स्वयं स्वीकार किया कि वह फर्जी रूप से IPTAFS अधिकारी बनकर घूम रहा था.

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