Patna: भूमि से जुड़े जटिल विवादों के त्वरित, पारदर्शी और मानवीय समाधान के उद्देश्य से चल रहे भूमि सुधार जनकल्याण संवाद कार्यक्रम को लेकर उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि एक ही प्रकृति की शिकायतों पर अलग-अलग निर्णय अब नहीं लिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि भूमि संबंधी समस्याओं को सुनने के क्रम में अनेक प्रकार के विवाद सामने आते हैं, जिनके समाधान के लिए इस कार्यक्रम में अमीन, राजस्व कर्मचारी, अंचलाधिकारी, डीसीएलआर, एडीएम, डीएम, कमिश्नर से लेकर विभाग के प्रधान सचिव और सचिव तक की उपस्थिति सुनिश्चित की जाती है. कार्यक्रम से एक दिन पूर्व ही विभाग के प्रधान सचिव अन्य अधिकारियों के साथ जिले में पहुंचकर वहां की भूमि समस्याओं का आंकलन करते हैं.

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्व महा-अभियान के दौरान कुल 46 लाख आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से लगभग 40 लाख आवेदन केवल परिमार्जन/नाम संशोधन से संबंधित थे. उन्होंने कहा कि जनकल्याण संवाद के माध्यम से इन परिमार्जन मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए समय-सीमा निर्धारित की जाती है. पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अंचलवार रजिस्ट्रेशन काउंटर खोले जाते हैं, जहां संबंधित अंचल के साथ-साथ अन्य अंचलों के पदाधिकारी भी शामिल रहते हैं. उन्होंने कहा कि हम इस कार्यक्रम के माध्यम से जमीन की बीमारी की पहचान कर रहे हैं. जमीन की समस्या जटिल है, और जमीन जमीर को भी प्रभावित करती है. बिहार में जमीन विवाद के कारण बहुत लहू बहा है, इसे रोकना है और विकास की धारा को आगे बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि परिमार्जन के लंबित मामलों के कारण बिहार के किसान कई सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं. हमारा लक्ष्य परिमार्जन प्लस के 40 लाख आवेदनों का शीघ्र निष्पादन करना है.

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि प्राप्त शिकायतों में से 8363 मामलों में 2414 का समाधान अब तक किया जा चुका है. इस संवाद कार्यक्रम की सराहना विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने भी की और इसे अत्यंत लोकप्रिय संवाद बताया। वहीं, राजद के डॉ. सुनील कुमार सिंह ने भी उपमुख्यमंत्री की इस पहल की प्रशंसा की.

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