Patna: लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा संचालित राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “हर घर नल का जल” के क्रियान्वयन की निरंतर समीक्षा एवं राज्यव्यापी निरीक्षण के क्रम में, कार्य निष्पादन में पाई गई गंभीर लापरवाही को संज्ञान में लेते हुए कार्यपालक अभियंता अमित कुमार एवं कार्यपालक अभियंता मोहम्मद अख्तर के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है. विभागीय निरीक्षण एवं प्राप्त प्रतिवेदनों में जलापूर्ति योजनाओं के संचालन, अनुरक्षण तथा फील्ड-स्तरीय निगरानी में निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रगति नहीं पाए जाने के आधार पर दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है.
विभागीय समीक्षा में यह पाया गया कि अमित कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, लोक स्वास्थ्य प्रमंडल, जहानाबाद (वर्तमान पदस्थापन लोक स्वास्थ्य प्रमंडल, सासाराम) द्वारा जहानाबाद प्रमंडल में अपने कार्यकाल के दौरान CGRC पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध एवं संतोषजनक निष्पादन सुनिश्चित नहीं किया गया. कई मामलों में शिकायतों को निष्पादित दर्शाए जाने के बावजूद शिकायतकर्ताओं से प्राप्त फीडबैक असंतोषजनक पाया गया. इसके अतिरिक्त चापाकल मरम्मति, आंगनबाड़ी केंद्रों में पेयजल उपलब्धता, निविदा निष्पादन तथा विभागीय एवं जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों में सहभागिता के स्तर पर भी गंभीर लापरवाही पाई गई. पूर्व में दिए गए निर्देशों एवं स्पष्टीकरण के बावजूद उनकी कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ.
इसी प्रकार मो. शमी अख्तर, कार्यपालक अभियंता, लोक स्वास्थ्य प्रमंडल, औरंगाबाद के विरुद्ध यह तथ्य सामने आया कि औरंगाबाद प्रमंडल में उनके कार्यकाल के दौरान “हर घर नल का जल” योजना अंतर्गत अनुरक्षण एवं मरम्मति (O&M) कार्यों से संबंधित भुगतानों में अनावश्यक विलंब किया गया. साथ ही निविदा निष्पादन में प्रक्रियागत अनियमितताएँ पाई गईं तथा कुछ मामलों में वित्तीय अनुशासन के अनुरूप कार्य नहीं किया गया. CGRC पोर्टल पर शिकायतों के निष्पादन में बार-बार शिकायतों के पुनः खुलने (Reopen) एवं भ्रामक अनुपालन के कारण योजनाओं के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा.
उक्त तथ्यों के आलोक में विभाग द्वारा दोनों अधिकारियों को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया गया है.
इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री संजय कुमार सिंह ने बताया कि “हर घर नल का जल” योजना राज्य सरकार की अत्यंत महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना है, जिसके माध्यम से प्रत्येक ग्रामीण परिवार को सुरक्षित एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना अनिवार्य दायित्व है. उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा योजनाओं के संचालन, अनुरक्षण एवं शिकायत निवारण की नियमित समीक्षा की जाती है और जहाँ भी गंभीर शिथिलता पाई जाती है, वहाँ विभागीय नियमों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है.
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई विभाग के लिए अंतिम विकल्प के रूप में की गई है. उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि योजनाओं का प्रभावी एवं जवाबदेह क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है. इसके बावजूद यदि “हर घर नल का जल” जैसी जनहित से जुड़ी योजना में लापरवाही पाई जाती है, तो भविष्य में भी विभाग जनहित में आवश्यक कठोर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा.
