Patna: भागलपुर में ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षा में फर्जीवाड़े के इंटरस्टेट गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस सात आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोपी में सुमित कुमार, गौतम कुमार, बंटी कुमार, नितीश कुमार, अंकित कुमार, शिवम कुमार और करन सिंह का नाम शामिल है. आरोपी नालंदा, मुंगेर, भागलपुर के विभिन्न इलाकों के रहने वाले है. आरोपी के निशानदेही पर ब छात्रों के प्रमाण पत्र, अंक पत्र, प्रवेश पत्र, चेक, पासबुक, एटीएम, डेबिट, क्रेडिट कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, कंप्यूटर सिस्टम, मोबाइल फोन, प्रश्नपत्र सेट और परीक्षा से जुड़े अन्य दस्तावेज पुलिस ने बरामद किया है. आरोपी लैब टेक्नीशियन, कम्प्यूटर टेक्नीशियन के रुप में घूमकर लोगो को फंसाता था. गिरोह का सरगना फिलहाल फरार चल रहा है. कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के दौरान सॉल्वर का काम करता था.
मामले की जानकारी देते हुए सिटी एसपी ने बताया कि एसएसपी को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति है जो दिल्ली पुलिस कांस्टेबल का परीक्षा देने आया है. उसको कुछ लोग दवाब देकर पैसे मांग रहा है. छापेमारी टीम कुछ लोगो को हिरासत में लेकर पुछताछ किया गया. तो पता चला कि इस व्यक्ति को 6 लाख देकर भेजा गया था कि एक्जाम क्लियर करा दिया जाएगा. अलीगढ़ से भागलपुर आए करण सिंह के कथित अपहरण मामले का खुलासा में पुलिस ने अपहरण, ठगी और परीक्षा में धांधली करने वाले एक संगठित इंटरस्टेट गिरोह का पर्दाफाश किया है. करण सिंह लाजपत नगर स्थित अंग इंस्टिट्यूट में दिल्ली पुलिस कॉस्टेबल की परीक्षा देने आया था और उसके अपहरण की सूचना मिली. परिजनों से दो लाख रुपये की फिरौती मांगे जाने की सूचना पर मामले की गंभीरता को देखते हुए छापेमारी के दौरान पुलिस टीम मुरारी यादव के मकान के सामने पहुंची तो करीब आधा दर्जन संदिग्ध पुलिस वाहन देखकर भागने लगा. जिसे घेराबंदी कर पकड़ा गया. पूछताछ में उनकी पहचान सुमित कुमार, गौतम कुमार, बंटी कुमार, नीतीश कुमार, अंकित कुमार, शिवम कुमार उर्फ भूषण और कथित अपहृत छात्र करण सिंह के रूप में हुई. प्रारंभिक जांच में सामने आया कि करण सिंह का अपहरण वास्तविक नहीं था, बल्कि यह गिरोह की सुनियोजित साजिश का हिस्सा था. जांच में पता चला कि कि यह गिरोह पंजाब, हरियाणा और यूपी से भागलपुर का सेंटर करवाकर भेजा जाता था. बहला-फुसलाकर उनसे मोटी रकम वसूलता था. रकम न देने पर अपहरण जैसी घटनाओं को अंजाम देने की योजना बनाई जाती थी. पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह में कई CBT परीक्षा केंद्रों से जुड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं. आरोप है कि गिरोह कंप्यूटर सिस्टम को हैक कर दूर से स्क्रीन संचालित करता था और सॉल्वर, गूगल और चैटजीपीटी जैसे माध्यमों से सही उत्तर भरवाता था. गिरोह के नेटवर्क और परीक्षा केंद्रों में संभावित मिलीभगत की गहन जांच की जा रही है.
